Do you know what the biggest sacrifice for success is? In this video, we’ll learn from Cristiano Ronaldo’s life how an ordinary boy, who faced poverty, loneliness, and physical weakness, became the world’s greatest footballer. You’ll discover deep lessons behind Long-Term Commitment, Dedication, and Sacrifice that can transform your life. This video will teach you how to embrace struggles, stop deceiving yourself, and master the art of staying focused on your goals even in tough times. You’ll also learn practical tips like Visualization and Gratitude Practice to boost your mental toughness. If you’re ready to step out of your comfort zone and achieve real success, this video is for you
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Video Summary
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This video explores the philosophy that accepting life's inherent difficulties is the first step toward success, using Cristiano Ronaldo's journey as a primary example. It emphasizes that greatness requires sacrifice, long-term commitment, and a willingness to embrace struggle rather than avoiding it through comfort or complaints.
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खुद से जीतने वालो को मेरा सलाम और प्रणाम
The Road Less Traveled किताप की पहली दो लाइने है जीवन कठिन है
जिस दिन आप ये सुइकार लेते हो उस दिन से जीवन आसान हो जाता है
जीहां जीवन आसान हो जाता है क्योंकि आप ताकतवर बनने के लिए
रोनाल्डो के बच्पन में ही ऐसी परिस्थेतिया बनी जिस से वे बहुत चल्दी समझ गए
कि जीवन कठिन है और सफलता बलिदान मांगती है
रोनाल्डो के पिता युद्ध से लोटने के बाद माल्सिक रूप से परिशान थे
उनके पास कोई जौब नहीं था
उन्होंने सच्चाय को हेंडिल करने के लिए शराब का सहारा लिया
मां चार बच्चों का खर्चा चलाने के लिए दो-दो जौब्स करती
घर के नाम पर टीन की छट थी
इसके साथ-साथ रोनाल्डो बच्पन से कमजोर था
स्कूल के बच्चे अकसर रोनाल्डो की गरीबी और कमजोर कतकाठी का मजाग उडाते
रोनाल्डो के गौटफादर कहते हैं कि वो आम बच्चों जैसा ही था
उसमें कोई खास विशेष्टा नहीं थी
लेकिन उसके अंदर कुछ करनी की आदम में एकच्छा थी
रोनाल्डो के अंदर फूटबॉल का इतना जुनून था
वो प्लास्टिक की बॉटल से या मोजे और पन्नी की बॉल बनाकर दिन भर खेलता रहता
स्कूल से वापस आता तो खाना छोड़कर भाग जाता
इसी प्रैक्टिस ने उसकी ड्रिबलिंग और बैलेंस की नीव रखी
रोनाल्डो ने बहुत जल्दी सीख लिया था कि कुछ अच्छा करने के लिए बढ़ा त्याग करना पड़ता है
पे कहते हैं कि मेरी मां दो-दो जगे काम करती, दूर तक पैदल चलती
और रात में फूकी सो जाती ता कि मैं फूटबॉल खेल सकूं
पैसे की कमी के भागचूद उन्होंने मुझे बाहर भेजने का फैसला किया
तोस्तों आज सुख सुविदाओ और टेकनॉलॉजी के बीच में हमें ये लगता है कि जिन्दगी आसान होनी चाहिए
इसलिए जब भी तकलीफ होती हैं तो हम अपना रास्ता बदलने लगते हैं या शिकायत करते हैं
क्योंकि हम भूल चुके हैं कि संघर्ष जीवन का सच है
हम आज ये भूल गए हैं कि हर अच्छी चीज, हर अच्छी आदत के लिए कीमत चुकानी परती है
अगर कुछ आसानी से मिल भी जाए तो वो एक अपवाद यानी एक्सेप्शन है
इसलिए जिस दिन से आप ये सुइकार लोगे कि लाइफ इस डिफिकल्ट, जीवन आसान होने के लिए नहीं बना
उसी दिन से मुश्किलें आपको विचलित नहीं करपाएंगी
क्योंकि आपको समझ आजाएगा कि कमबल की कर्मी में रहकर मैं गूल पूरे नहीं कर सकता
रोनाल्डो लिस्बन पहुँझे और यहां सैक्रिफाइस का नया अध्याय शुरू होने वाला था
देश की राजथानी लिस्बन में सबसे अच्छी फुटबॉल कोचिंग और बहत्रीन स्कूल्स थे
लेकिन 11 साल के रोनाल्डो के लिए यह जीवन का सबसे कठिन समय था
कारण अकेलापन और प्रेशर
अकेलापन इसलिए क्योंकि मदीरा और लिस्बन में भाषा बोलने की तरीके में यहनी प्रनन्सियेशन में अंतर है
रोनाल्डो अपने शहर के तरीके से बोलते जो लिस्बन के लड़कों को बहुत अजीव लगता
वे रोनाल्डो का मज़ाग उड़ाते और कई अजीव नामों से चड़ाते
परिवार से दूर 11 साल के रोनाल्डो अकेला महसूस करते और हर रात रोते हुए सोते
दूसरी तरफ लिस्बन स्पोर्टिंग लग का माहौल बेहत कोमिटेटिव था
उनके कमजोर शरीर जहंकती हुई हडियों के कारण
क्लब के लोगों को उमीधी नहीं थी कि रोनाल्डो कभी प्रोफेशनल फुटबॉलर बन पाएंगे
हालात इतने मुश्किल हुए कि क्लब ने उने 3-4 दिन के लिए घर वापस बेच दिया
इन 3-4 दिनों में रोनाल्डो ने नजाने क्या सोचा
पर जब वे वापस आये तो उनकी सर पर अलग जुनुन सबार था
रोनाल्डो पहले से ही मेहनत कर रहे थे
लेकिन लोटने के बाद वो ट्रेनिंग के अलावा घंडो प्रैक्टिस करते
रात में जब बागी खिलाड़ी आराम कर रहे होते
तब रोनाल्डो अपने दोस्त मिगल पैकसाओ के साथ रात में छिप कर जिम जाते
वहाँ वे तो घंटे एक्स्ट्रा ट्रेनिंग करते
रोनाल्डो के बेहतरीन खेल के कारण अठारा साल की उम्र में मैन्यू ने उने साइन कर लिया
क्रिटिक्स का कहना था कि ये छोटी उम्र का लड़का इतने बड़े क्लब का प्रेशर नहीं जहिल पाएगा
पर वो ये नहीं जानते थे कि रोनाल्डो को अब तक समझ आ चुका था
दुनिया का सर्वश्रेष्ट फूटबॉलर बननी के लिए उने मेंटली, फिजिकली और एमोशनली बेहतर होते जाना है
रायन हॉलिडे कहते है कि डेडिकेशन का मतलब है कथिन अभ्यास करने का लॉंग टर्म कमिटमिटमिट खासकर तब जब परिस्थिती मुश्किल हो जाये
तो उसतों एक एकजाम और एक रिजल्ट बेहतर या बेकार जीवन नहीं बनाता
आपको हमेशा अच्छे रिजल्ट पैदा करने के लिए सीखने और अभ्यास करने का लॉंग टर्म कमिटमिटमिट जाये होता है
इसी लॉंग टर्म कमिटमिटमिट के कारण एक वो समय आया जब कमजोर समझा चाने वाला लड़का सबसे फिट प्लेयर के रूप में जाना जाने लगा
तुस्तो डेडिकेशन पैदा करने के लिए इस वीडियो से सबसे पहली सीख ये लेकर जाओ कि जीवन में संघर्ष बहुत सरूरी है
अगर आपको किसमत से बिना कीमत चुकाए कुछ मिल भी जाए तो आपका वही हाल होगा जो 95% लॉटरी जीतने वालों का होता है
पुरे दौर से लड़ने के लिए उनके पास धैर्य, संकल्प, कमिटमेंट, वर्क एथिक और विश्वास नहीं होता
जिस कारण वे जीते हुए पैसे कुछी दिनों में खो देते हैं और पहले से भी बहुत जादा दुख और शिकायट से भर जाते हैं
इसलिए चल्दी से चल्दी संघर्ष को सुइकारो चानों की सफलता बलिदान मांगती है और खुद को मजबूत बनाओ
अंदरी अंदर हम सबको पता होता है कि आज के एक्शन्स का, आज की आलस और मकारी का भविष्य में क्या रिजल्ट होगा
लेकिन हम फिर भी खुद को धूका देते रहते हैं
हम चमतकार की उमीद करते हैं कि आखिर में शायद थोड़ी मेनद करेंगे तो कुछ रिजल्ट बदल जाएगा
लेकिन हम खुद को धूका क्यों देते हैं
क्योंकि अंदर से एक आवाज डराती है तुम वैसे ही लायक नहीं हो
और हम इस डर की आवाज के आगे नहीं जा पाते
याद रखो कमबल की गर्मी में कोल्स पूरे नहीं होते
जो लोग चुनौतियां या कश्ट उठाने को तैयार नहीं होते
वो धीरे धीरे दुनिया की बढ़ती भीड में कुम हो जाते हैं
आपके पास अभी समय है, संसादन है, कल समय नहीं जिम्मेदारिया होंगी
आज तैय करो क्या मैं Consistency और Intensity से पहनत करने को तैयार हूँ
क्या आज मैं Rejection जहिलने तैयार हूँ
दोबारा सीखने और अकेले चलने तैयार हूँ
इसके बार डेडिकेशन बनाने के लिए प्रोसेस पर भरोसा करना सीखो
रोनाल्डो की तरह पहले goals बनाओ, फिर प्रोसेस तैय करो
कि हर दिन मुझे ये पाँच काम इस तरह से करने हैं
और समय के साथ इने बहतर करते जाना है
अगली प्रैक्टिकल टिप बहुत काम किये, कथिन अभ्यास के लिए विजुलाइजैशन
हम ख़िन प्रैक्टिस करते हैं तो दिमाग और शरीर धगता है
लगिन दिमाग का काम तो शारीर को कष्ट से बचाने का है
इसलिए अगली बार कठिन काम करने का मन ही नहीं होता।
इसलिए दिमाग अन्जाने में कठिन प्रैक्टिस को टालता रहता है।
डेविट कौगिन्स कहते है मैं ट्रेनिंग के सबसे कठिन और बोरिंग हिस्से को विजुलाइस करता हूँ।
जैसे मैंने 60-60 मिनिट ध्यान से बड़ा, बोरिंग टॉपिक होने के बावचूद बार-बार फूकस करता रहा।
जिस कारण मैंने समय रहते टास्क अच्छे से पूरा किया और उसके बाद मुझे बहुत खुशी महसूस हो रही है।
इस प्रकार कठिन कामं को पहले ही विजुलाइस करने से कठिन अभ्यास के लिए भी कमिट्पिंट और जोश पैदा होता है।
अगली बाद लॉंग टर्म कमिट्पिंट, फेलियर में क्रोट देखो।
जो लोग प्रॉसेस फालो करते हैं, उन्हें अपने फेलियर में क्रोड दिखती है, क्योंकि वो समझ पाते हैं कि मुझे प्रॉसेस के ये स्टेप्स पहतर करना है, जिससे रिजल्ट्स अपने आप पहतर होंगे।
अगली बाद डेडिकेशन के लिए ग्रेटिट्यूट प्राक्टिस। यह बहुत प्राक्टिकल तरीका है, जिससे नेगेटिव एमोशनल रियाक्शन नियंत्रण में आते हैं।
हर दिन जीवन में आने वाले फ्रस्ट्रेशन, गल्टियों, अत्मान और बैट लग सब के लिए धन्यवाद दो, क्योंकि ये वो राउ मटेरियल हैं जो आपके आने वाला जीवन बहतर बनाएंगी।
तुस्तों बस यही तरीका है अपने अंदर डेडिकेशन पैदा करने का और उस जीवन के लिए कमिटेट होने का जो आप बनाना चाहते हो।
इस किताब में बताया गया कि हम विल्बावर की कमी के कारण नहीं या शरीर की इच्छा के कारण नहीं बल्कि गलत बिलीव सिस्टम के कारण पॉन्ड नहीं छोड़ पाते।
अगली वीडियो से आपको बहुत कुछ सीखने मिलेगा। इसे जरूर देखिये।
मैं काम के किस्से लाता रहूंगा।
हिम्मत, हरकत, हुशियारी। हम जीतेंगे।