महान धर्म का प्रसार | Hindi
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महान धर्म का प्रसार
[Intro]
हो ओह… धीमे हो ओह धीमे…
सूरज पूरब उगे, पश्चिम में ढले ओह…
हो ओह… धीमे हो ओह धीमे…
सृजन, स्थिरता, पतन—सब बदलता…
देव लोक से उतरे, धर्म की राह निहारें,
धर्म पाकर, स्वर्ग लौटें, यही है दैवी इच्छा…
हो ओह… ओ हो… धीमे हो ओह धीमे…
[Verse 1]
हो ओह… मेरे साथी, मैं गाऊँ…
धन-दौलत से मत ढँक लेना आँखें ओह…
सौ बरस जीवन, जैसे एक सपना,
नाम और दौलत, सब शून्य में जाएँ…
महान धर्म फैले, पर लोग भटक जाएँ,
इस क्षणभंगुर जग में, मूल कैसे भूलें…
हो ओह… ओ हो… धीमे हो ओह धीमे…
[Call and Response]
[Male:]
हो ओह… बहना, मैं पूछूँ…
क्यों लोग सोना-चाँदी के पीछे भागें?
[Female:]
हो ओह… भैया, मैं गाऊँ…
धन तो हवा सा, आकर चला जाए…
[Together:]
धर्म पाना ही स्वर्ग का सच्चा मार्ग,
मोह और लोभ में डूबे, दुख सागर में खोए ओह…
[Bridge]
हो ओह… धीमे हो ओह धीमे…
जीवन सौ बरस, धुएँ सा हल्का…
सोने की चमक से मन मत खोना,
धर्म फैले फिर भी लोग हैं खोए…
[Outro]
हो ओह… मेरे साथी, मैं गाऊँ…
महान धर्म फैले, पर लोग हैं खोए ओह…
धर्म पाकर स्वर्ग लौटना ही सच्चा मार्ग…
हो ओह… ओ हो… हो ओह…
हो ओह… धीमे हो ओह धीमे…

